विज्ञान संचार में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम

विज्ञान संचार में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम

MS Course

पृष्ठभूमि:

देश की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति वैज्ञानिक ज्ञान एवं सोंच को बढ़ावा देने पर बल देती है। ज़्यादातर विज्ञान एवं प्रौद्योगिक प्रयोगशालाओं को विज्ञान को लोकप्रिय बनाने एवं विज्ञान के सम्प्रेषण का कार्य करने का सामाजिक जनादेश है। यहाँ तक कि भारत के संविधान में भी वैज्ञानिक सोंच एवं प्रेक्षा करने कि प्रवृति को बढ़ाने हेतु विशेष प्रावधान है। विश्व में विज्ञान केन्द्रों एवं संग्रहालयों का सबसे बड़ा नेटवर्क होने के नाते राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद ने बिड़ला विज्ञान एवं तकनीकी संस्थान, पिलानी के साथ मिलकर विज्ञान संचार में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू किया है।

 

संभावना:

आज विज्ञान संचार विकसित एवं विकासशील देशों में एक उभरता हुआ क्षेत्र है। ऐसा माना जाता है कि विज्ञान से संबन्धित लोग अपनी दक्षता इत्यादि को आम जन तक नहीं पहुंचा पाते हैं। मीडिया में भी इस क्षेत्र का कम कवरेज सर्वविदित है। इसलिए दक्ष विज्ञान पत्रकार, लेखक, संप्रेषक की मांग मीडिया घरानों, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबन्धित संस्थाओं एवं प्रयोगशालों में काफी है।

 

पाठ्यक्रम:

इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद ने बिड़ला विज्ञान एवं तकनीकी संस्थान, पिलानी के साथ मिलकर कोलकाता स्थित मुख्यालय से विज्ञान संचार में दो वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू किया है। यह पाठ्यक्रम मुख्यतः साइन्स और इंजीन्यरिंग स्नातकों को दक्ष विज्ञान संप्रेषक बनाने हेतु बनाया गया है।

 

प्राध्यापक:

स्मिथसोनियन, अमेरिका, जादवपुर विश्वविद्यालय, नेशनल डिज़ाइन संस्थान इत्यादि से प्राध्यापकों का सहयोग लिया जाता है।

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