मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब का एक शेर है-

रगों में दौने, फिरने के हम नहीं कायल,

जब आँख ही से न टपका, तो फिर लहू क्या है

किसी सामान्य व्यक्ति के लिए यह महज़ एक शेर हो सकता है, पर एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले व्यक्ति के लिए इसमें भी एक संदेश छुपा हुआ है। क्या अपने गौर किया। नहीं। ये निश्चय ही गौर करने की बात है कि क्या खून सिर्फ रगों में ही दौड़ता है? क्या वह आँख से भी टपक सकता है या क्या शरीर के किसी अन्य भाग यथा अस्थि, चमड़े या किसी और जगह में भी फैल सकता है? क्या आप जानते हैं कि रक्तसंचार की प्रणाली का पता सबसे पहले किसने लगाया था? आइये मिलकर पता करते हैं-

इंग्लैंड के एक चिकित्सक विलियम हार्वे ने सबसे पहले इस बात का पता लगाया था। डॉ. हार्वे ने रक्तसंचार की पूरी प्रक्रिया एवं उसमें मस्तिस्क की भूमिका की विवेचना की। उन्हें आधुनिक शरीर विज्ञान का पिता भी कहा जाता है। इसके पूर्व ग्रीक चिकित्सक गलेन ने बताया था कि रक्त किडनी में बनता है और पूरे शरीर द्वारा अवशोषित किया जाता है। हार्वे ने अपने विच्छेदन और जीवच्छेदन के प्रयोगों से शरीर में रक्त-संचार प्रणाली का पता लगाया। उन्होने सबसे पहले दिल की धड़कन का निरीक्षण किया और उन्हे फुफ्फुस रक्त परिसंचरण का पता लगा। उन्हे एक तरफा रक्त संचरण का भी पता चला। दिल से पंप रक्त की मात्रा को खोजने के अपने प्रयास में वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि धमनियों से एक निश्चित मात्रा में रक्त का संचार होता है और फिर वही दिल से होकर शिराओं के माध्यम से वापस आता है। उन्होने अपने शोध की विस्तृत व्याख्या 1628 में एक प्रकाशन ‘एन अनाटोमिकल स्टडी ऑफ द मोशन ऑफ द हार्ट एंड ऑफ द ब्लड इन एनिमल्स में की।

 1 अप्रैल 1578 को केंट, इंग्लैंड में जन्मे विलियम हार्वे की यह खोज निश्चय ही मेडिकल साइन्स को एक अनमोल देन है। 1651 ईस्वी में उन्होने एक किताब ‘एसेज ऑन द जेनेरेशन ऑफ एनिमल्स’ लिखी जिसे वर्तमान भ्रूणविज्ञान का आधार माना जाता है।

विलियम हार्वे को उनके जन्मदिन पर हमारी श्रद्धांजलि।

2 Responses to रक्तसंचार की खोज
  1. सूर्या पारीक May 1, 2018 at 5:49 PM Reply

    इस शानदार पोस्ट के लिए धन्यवाद। इस तरह की और सामाग्री पोस्ट करें।

  2. धन्यवाद एनसीएसएम


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